मज़ाक जो हद पार कर गया
कक्षा में एक मज़ेदार उपनाम चल पड़ता है, लेकिन जिस विद्यार्थी के लिए वह इस्तेमाल होता है, उसे अब वह अच्छा नहीं लगता। बच्चे शब्दों के असर को समझना, कहने पर रुकना, सच्चे मन से माफ़ी माँगना और व्यवहार बदलकर भरोसा लौटाना सीखते हैं।
दूसरों के कष्ट को अपना समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही करुणा का मूल मंत्र है।
कक्षा में एक मज़ेदार उपनाम चल पड़ता है, लेकिन जिस विद्यार्थी के लिए वह इस्तेमाल होता है, उसे अब वह अच्छा नहीं लगता। बच्चे शब्दों के असर को समझना, कहने पर रुकना, सच्चे मन से माफ़ी माँगना और व्यवहार बदलकर भरोसा लौटाना सीखते हैं।
दो यात्रियों को अलग-अलग कारणों से खिड़की वाली सीट चाहिए। एक-दूसरे को स्वार्थी मानने के बजाय वे अपनी ज़रूरत समझाते हैं, ध्यान से सुनते हैं और ऐसी व्यवस्था ढूँढ़ते हैं जो दोनों के प्रति संवेदनशील और निष्पक्ष हो।
स्कूल का समारोह ऐसे कई लोगों के पर्दे के पीछे किए गए काम से सफल होता है, जिन्हें विद्यार्थी अक्सर नहीं देख पाते। कक्षा सम्मानपूर्वक धन्यवाद देना, हर योगदान पहचानना और रोज़मर्रा के व्यवहार से कद्र दिखाना सीखती है।
एक कथावाचक एक विवाद के दो संभावित अंत सुनाता है। श्रोता समझते हैं कि अधूरी जानकारी निर्णय बदल सकती है, साथ ही यह भी कि लापरवाह व्यवहार से हुआ नुकसान स्वीकार करना ज़रूरी है।
लंबी यात्रा में एक समूह के पास केवल एक गरम भोजन बचता है। वे बात करते हैं कि किसे कितनी भूख है, कितना सामान बचा है और किसी की ज़रूरत छिपाए बिना भोजन कैसे बाँटा जाए।
भयभीत नन्हे कपोत की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस तराजू पर तौलने वाले त्यागी राजा शिवि की पावन अमर कथा।