मज़ाक जो हद पार कर गया
कक्षा में हँसी-मज़ाक के नाम पर एक निर्धन साथी के पुराने स्वेटर पर की गई फब्ती जब आँसुओं में बदल गई, तो एक मज़ाकिया छात्र को समझ आया कि जहाँ दूसरे की आँखों में दर्द हो, वह मज़ाक नहीं बल्कि क्रूरता होती है।
दूसरों के कष्ट को अपना समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही करुणा का मूल मंत्र है।
कक्षा में हँसी-मज़ाक के नाम पर एक निर्धन साथी के पुराने स्वेटर पर की गई फब्ती जब आँसुओं में बदल गई, तो एक मज़ाकिया छात्र को समझ आया कि जहाँ दूसरे की आँखों में दर्द हो, वह मज़ाक नहीं बल्कि क्रूरता होती है।
ट्रेन में खिड़की की सीट पर बैठने के अपने अधिकार को लेकर अड़े एक छात्र की वह कथा, जिसने जब एक बुजुर्ग महिला की गंभीर बीमारी और मजबूरी को समझा, तो अपनी सीट त्यागकर जाना कि अधिकारों से बड़ा धर्म संवेदनशीलता और करुणा होती है।
स्कूल के भव्य वार्षिक उत्सव की चकाचौंध में जब सभी लोग मंच पर भाषण देने वालों की तारीफ कर रहे थे, तो एक छात्रा ने भोर के चार बजे से पसीना बहाने वाले सफाईकर्मियों और मालियों की अनदेखी मेहनत को पहचानकर उन्हें वह सम्मान दिलाया जिसके वे सच्चे हकदार थे।
वाचन-क्लब में कथावाचक सना दो छात्रों — मीरा और रोहन — के एक झगड़े के दो अलग-अलग अंत सुनाती है। पहले अंत में दोनों ने अनुमान लगाए और काम बिगाड़ा। दूसरे अंत में उन्होंने एक-दूसरे से पूछा, सुना और नुकसान की भरपाई की। दोनों अंत देखकर श्रोताओं ने जाना — अनुमान लगाने से पहले पूछना ही समझदारी है।
लंबी यात्रा में एक समूह के पास केवल एक गरम भोजन बचता है। वे बात करते हैं कि किसे कितनी भूख है, कितना सामान बचा है और किसी की ज़रूरत छिपाए बिना भोजन कैसे बाँटा जाए।
भयभीत नन्हे कपोत की रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस तराजू पर तौलने वाले त्यागी एवं सत्यनिष्ठ राजा शिवि की पावन अमर कथा।