कक्षा 4 — कक्षा 4: धैर्य, साहस व विनम्रता
कठिनाइयों में धैर्य रखना, गलती होने पर क्षमा माँगना और दूसरों की सफलता पर प्रसन्न होना।
कठिनाइयों में धैर्य रखना, गलती होने पर क्षमा माँगना और दूसरों की सफलता पर प्रसन्न होना।
दादाजी ने यश को सिखाया कि प्रकृति, माता-पिता, गुरु, समाज और मूक जीवों का आभार मानना ही पंच महायज्ञ का सच्चा स्वरूप है।
सहपाठी की पुस्तक पर स्याही गिरने पर साहिल ने झूठ बोलने के बजाय अपनी भूल स्वीकार की और अपनी जेब-खर्च से नई पुस्तक भेंट की।
मोहल्ले में सड़क चौड़ीकरण के समय नीम के पुराने वृक्ष को कटने से बचाने के लिए मान्या और बच्चों ने शांतिपूर्ण प्रयास कर वृक्षारोपण की शर्त रखवाई।
मानस अपने जूते स्वयं पॉलिश करता है, अपनी मेज खुद साफ करता है और सफाई कर्मचारियों को आदरपूर्वक संबोधित करता है।
जब कुछ बड़े छात्र एक नए और शांत बच्चे को डरा रहे थे, तो मानवी ने निडर होकर उनका विरोध किया और शिक्षक को सूचित कर न्याय दिलाया।
चित्रकला प्रतियोगिता में मित्र के प्रथम आने पर जयंत ने निराश होने के बजाय उसे सच्चे दिल से बधाई दी और उसकी सुंदर कला से प्रेरणा ली।
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