कक्षा 5 — कक्षा 5: सेवाभाव व समाज-चेतना
परोपकार, जरूरतमंदों की सहायता, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और भेदभाव से मुक्ति।
परोपकार, जरूरतमंदों की सहायता, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और भेदभाव से मुक्ति।
गुरुजी ने बच्चों को समझाया कि भारतीय संस्कृति केवल अपने लिए नहीं, अपितु जड़-चेतन समस्त सृष्टि के कल्याण और आरोग्य की प्रार्थना सिखाती है।
बाढ़ राहत शिविर में शौर्य ने अपनी छुट्टियों में भोजन पैकेट तैयार कर वितरित किए और सीखा कि परोपकार ही जीवन का सच्चा आभूषण है।
किसान, कुम्हार और बुनकर के परिश्रम को निकट से देखकर छात्र समूह ने समझा कि देश का निर्माण महलों में नहीं, पसीना बहाने वाले हाथों से होता है।
महर्षि दयानंद और स्वामी श्रद्धानंद के जीवन प्रसंगों से छात्रों ने सीखा कि सत्य के लिए कष्ट सहना और अंधविश्वासों से निर्भय होकर लड़ना ही वास्तविक वीरता है।
ऐतिहासिक किले पर नाम कुरेदते पर्यटकों को देखकर प्रियांश ने शालीनता से रोका और समझाया कि यह राष्ट्रीय धरोहर हम सबकी साझी विरासत है।
खेल प्रशिक्षक ने बच्चों को समझाया कि जंक फूड, तंबाकू और स्क्रीन की लत कैसे शरीर और मस्तिष्क को समय से पूर्व नष्ट कर देती है।
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