कक्षा 1: कक्षा 1: सद्गुणों की पहली किरण
दैनिक शिष्टाचार, अभिवादन, स्वच्छता, सत्य बोलना और बड़ों का आदर।
प्रार्थना और कृतज्ञता — ईश्वर व प्रकृति का आभार
नन्हीं रिया प्रातः उठकर सूर्य देवता और अपने माता-पिता को हाथ जोड़कर प्रणाम करती है और दिन की शुरुआत सकारात्मकता और कृतज्ञता से करती है।
सत्य बोलना और माता-पिता का आदर
खेलते समय माँ का मिट्टी का फूलदान टूटने पर आरव ने छुपाने के बजाय सच स्वीकार किया और माँ का अटूट विश्वास जीता।
स्वच्छता और प्रातः अभिवादन
अनन्या प्रतिदिन प्रातः दाँत साफ करती है, स्नान करती है और विद्यालय पहुँचकर शिक्षकों को हाथ जोड़कर नमस्ते कहती है।
मीठी वाणी और जादुई शब्द
कबीर ने जाना कि कृपया, धन्यवाद और क्षमा कीजिए जैसे शब्द कैसे सभी के दिलों को जीत लेते हैं और झगड़े मिटाते हैं।
मिलजुलकर खेलना और खिलौने साझा करना
पार्क में जब आर्यन ने अपनी गेंद अकेले खेलने के बजाय सभी बच्चों के साथ साझा की, तो खेल का आनंद कई गुना बढ़ गया।
नन्हे जीवों व पौधों से प्रेम
बालवाटिका में चिंटू ने गमलों में पानी दिया और बालकनी में चिड़ियों के लिए दाना-पानी रखा, जिससे चहचहाती गौरैया उसकी मित्र बन गईं।