कक्षा 8 — कक्षा 8: जीवन दर्शन व चरित्र निर्माण
सत्यमेव जयते, वसुधैव कुटुम्बकम्, कर्तव्यबोध, लैंगिक समानता और विश्व बंधुत्व।
सत्यमेव जयते, वसुधैव कुटुम्बकम्, कर्तव्यबोध, लैंगिक समानता और विश्व बंधुत्व।
समर ने सफाई कर्मचारियों का हाथ जोड़कर अभिवादन कर और एकांत में भी सत्यनिष्ठ रहकर चरित्र का वास्तविक मर्म सिद्ध किया।
अनिका ने विज्ञान प्रतियोगिता में निर्धन छात्र कबीर को समान स्थान और सम्मान दिया और उनके समूह ने राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार जीता।
गुरुजी ने जीवन के चारों सोपानों का संतुलन समझाते हुए बताया कि जब अर्थ और काम धर्म की मर्यादा में होते हैं, तभी जीवन आनंदमय होता है।
महर्षि पतंजलि के अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का दैनिक जीवन में व्यावहारिक अर्थ समझकर तरुण ने अपने आचरण को अनुशासित किया।
अंतरराष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि ने वसुधैव कुटुम्बकम् का विचार प्रस्तुत किया, जिसने विश्व के सभी प्रतिनिधियों को एक सूत्र में पिरो दिया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स के युग में नैतिक विवेक की आवश्यकता पर विचार करते हुए छात्रों ने जाना कि तकनीक साधन है, साध्य मानवीय मूल्य हैं।
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